देश-विदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों पत्रकार, 24 प्रतिभावान व्यक्तियों और 500 पत्रकारों को किया गया सम्मानित
जालना, महाराष्ट्र। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के तत्वावधान में जालना के मातोश्री लॉन्स, अंबड रोड में नौवें अंतरराष्ट्रीय पत्रकार सम्मान एवं सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ महाराष्ट्र के सभी जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकारों ने भाग लिया। इस दौरान पत्रकारों के हित, सुरक्षा, अधिकार, उत्पीड़न, संगठन की शक्ति और भावी कार्ययोजना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद मंचासीन अतिथियों को शॉल, बुके, स्मृतिपत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अशोक वानखेड़े बोले- पत्रकारिता लोकतंत्र की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम
सम्मेलन के मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अशोक वानखेड़े ने पत्रकारिता और पत्रकारों के सामने मौजूद चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार लिखने का कार्य नहीं है, बल्कि समाज की पीड़ा को आवाज देने और लोकतंत्र की रक्षा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार सुबह से देर रात तक समाज के बीच रहकर खबरें जुटाता है। वह पीड़ितों और गरीबों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के साथ भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ सवाल उठाता है। इस जिम्मेदारी को निभाने में पत्रकार का समय, सुख-चैन और कई बार उसकी सुरक्षा भी दांव पर लगी होती है।

अशोक वानखेड़े ने बदलते मीडिया परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि प्रिंट मीडिया के साथ डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता का तेजी से विस्तार हुआ है। इससे नए अवसर पैदा हुए हैं, लेकिन चुनौतियां भी बढ़ी हैं। तेजी से खबर देने की प्रतिस्पर्धा के बीच तथ्यपरकता और विश्वसनीयता बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने पत्रकारों से खबर प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि देश-विदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के पत्रकारों का एक मंच पर एकत्रित होना पत्रकार एकता का महत्वपूर्ण संदेश है।
अकरम रईस खान ने उठाया पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा
अकरम रईस खान ने कहा कि पत्रकार हमेशा दूसरों की समस्याओं पर सवाल उठाता है, लेकिन अब पत्रकारों की अपनी समस्याओं पर भी गंभीरता से चर्चा किए जाने की जरूरत है। जब कोई पत्रकार धमकी, उत्पीड़न, दबाव या भय का सामना करता है, तब उसके साथ खड़ा होना पूरे पत्रकार समाज की जिम्मेदारी है।
जिलाधिकारी अशिमा मित्तल बोलीं- प्रशासन और पत्रकारों के बीच बेहतर संवाद जरूरी
जालना जिलाधिकारी अशिमा मित्तल ने पत्रकारों को समाज का सजग प्रहरी बताते हुए कहा कि पत्रकार दिन-रात समाज की समस्याओं को सामने लाने और जनता की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन और पत्रकारों के बीच बेहतर संवाद लोकतंत्र को और मजबूत बनाता है। पत्रकार जब शासन-प्रशासन की कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं तो प्रशासन को भी समस्याओं में सुधार करने का अवसर मिलता है। इसलिए पत्रकार और प्रशासन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि जनहित के व्यापक उद्देश्य में सहयोगी की भूमिका निभा सकते हैं।
अशिमा मित्तल ने कहा कि तेज प्रतिस्पर्धा, बदलता मीडिया परिदृश्य, डिजिटल मीडिया का बढ़ता प्रभाव, आर्थिक चुनौतियां और समाचारों की विश्वसनीयता बनाए रखना आज पत्रकारों के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं।
कैलाश गोरंटियाल बोले- पत्रकार की कलम में समाज बदलने की ताकत
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक कैलाश गोरंटियाल ने कहा कि पत्रकार की कलम में समाज को बदलने की ताकत होती है और उस कलम को सम्मान, स्वतंत्रता एवं सुरक्षा मिलना आवश्यक है। पत्रकार जब निर्भय होकर जनता की आवाज उठाएगा और प्रशासन उस आवाज को संवेदनशीलता से सुनेगा, तभी लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।
उन्होंने सम्मेलन की सफलता के लिए इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पत्रकारों के हित और सम्मान के लिए आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रम पत्रकारिता जगत में नई ऊर्जा और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देते हैं।

सेराज अहमद कुरैशी बोले- सच लिखने पर पत्रकार को डरना पड़े तो लोकतंत्र के लिए चिंता
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि किसी पत्रकार को सच लिखने के कारण डरना पड़े, खबर प्रकाशित करने से पहले किसी दबाव की चिंता करनी पड़े या अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंकित रहना पड़े, तो यह केवल उस पत्रकार की समस्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी चिंता का विषय है।
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि पत्रकारों को सम्मानित करना अच्छी परंपरा है, लेकिन पत्रकार के सम्मान का वास्तविक अर्थ उसके काम की स्वतंत्रता, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना भी है। पत्रकार को सम्मान-पत्र और माला के साथ ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वह बिना भय के अपनी कलम चला सके।
पत्रकारों की एकता को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा गया कि अलग-अलग अपनी समस्याएं उठाने की तुलना में संगठित होकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने से पत्रकारों की आवाज अधिक मजबूत होती है। संगठन की शक्ति का इस्तेमाल पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान और पत्रकारिता की गरिमा की रक्षा के लिए होना चाहिए।
24 प्रतिभावान व्यक्तियों और 500 पत्रकारों का सम्मान
नौवें अंतरराष्ट्रीय पत्रकार सम्मान एवं सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के 24 प्रतिभावान व्यक्तियों तथा 500 पत्रकारों को स्मृतिपत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। देश-विदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए हजारों पत्रकारों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बनाया।
सम्मेलन में पत्रकारों ने अपने अधिकारों, सुरक्षा, स्वतंत्रता, सम्मान और भविष्य को लेकर एकजुटता प्रदर्शित की। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पत्रकारों को भयमुक्त और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
सम्मेलन में देश-विदेश से शामिल हुए पत्रकार और पदाधिकारी
इस अवसर पर नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार इस्तेयाक अहमद एवं मेवालाल यादव, राष्ट्रीय सचिव सलमान अहमद (प्रयागराज) एवं मसूद जावेद कादरी (खंडवा, मध्य प्रदेश), राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य मो. एजाजुल हक (भुवनेश्वर, ओडिशा), प्रोफेसर विजय कांबले, अण्णा भाऊ, इब्राहिम पाशा, बिहार प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार, मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष अशरफ आरिफ, बुंदेलखंड प्रदेश अध्यक्ष मो. कलाम कुरैशी, अरुण बंका, मनीष कमलिया, रफीक तिगाला, नेहाल अहमद, मराठवाड़ा प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद ताबिश, प्रदेश उपाध्यक्ष जावेद खान, प्रदेश संगठन सचिव सैय्यद अनवर कादरी तथा कार्यक्रम संयोजक एवं जिला अध्यक्ष आमेर खान उपस्थित रहे।

इसके अलावा सुनील भारती, शेख मुजीबुद्दीन, शेख सलीम, बाशित बेग, सैय्यद निसार, अनिल खडसे, देवीदास खरात, राजू कार्डिले, शकील खान, सलीम कुरैशी, महजबीन अंजुम, निकिता काले, मनीषा मगरे, हाफिज अहमद, सुबोध प्रसाद सिंह, गोपाल साहनी, सुनील कुमार, सैय्यद जाकिर और राहुल शेंडे सहित हजारों पत्रकार सम्मेलन में मौजूद रहे।
#IndianJournalistAssociation #IJA #JournalistConference #JournalistSafety #JournalistRights #पत्रकार #पत्रकारसम्मेलन #पत्रकारसुरक्षा #पत्रकारअधिकार #पत्रकारसम्मान #मीडियास्वतंत्रता #Jalna #JalnaNews #MaharashtraNews #AshokWankhede #SerajAhmadQuraishi #AshimaMittal #KailashGorantyal #MediaNews #Journalism #PressFreedom
