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बीसीसीएल माइंस में सुरक्षित ब्लास्टिंग पर मंथन, कल्याण भवन में 60 से अधिक अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण।

Bynoorimedia@2015

Aug 21, 2026

धनबाद। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की खदानों में सुरक्षित, नियंत्रित और आधुनिक ब्लास्टिंग तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कल्याण भवन (एचआरडी) में ‘ब्लास्टिंग टेक्निक्स फॉर बीसीसीएल माइंस’ विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यशाला में बीसीसीएल के विभिन्न क्षेत्रों से आए 60 से अधिक खनन प्रबंधकों एवं ब्लास्टिंग अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में बीसीसीएल तथा खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सुरक्षित एवं नियंत्रित ब्लास्टिंग, वैधानिक प्रावधानों, निर्धारित प्रक्रियाओं एवं एसओपी, विस्फोटकों की सुरक्षित हैंडलिंग और नवीनतम ब्लास्टिंग तकनीकों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। विभिन्न ब्लास्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी तकनीकी प्रस्तुतियों के माध्यम से आधुनिक तकनीकों और कार्यप्रणालियों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षित ब्लास्टिंग बेहद महत्वपूर्ण : संजय कुमार सिंह

कार्यक्रम में निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी/संचालन) संजय कुमार सिंह, डीएमएस (रीजन-1, सेंट्रल जोन), डीजीएमएस टॉम मैथ्यू, डीएमएस (रीजन-2, सेंट्रल जोन) जी. संजय कुमार, डीडीएमएस राहुल पुरोहित, डीडीएमएस रौनक मंडल, महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) सुधाकर प्रसाद तथा महाप्रबंधक (आईडी), बीसीसीएल एम.आर. श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों से तकनीकी सत्रों में सक्रिय सहभागिता करने तथा विशेषज्ञों से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।

निदेशक (तकनीकी/संचालन) संजय कुमार सिंह ने कहा कि बीसीसीएल की अधिकांश खदानें घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित होने के कारण यहां खनन गतिविधियों की चुनौतियां अपेक्षाकृत अधिक हैं। ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित एवं नियंत्रित ब्लास्टिंग का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने ब्लास्टिंग से संबंधित सभी निर्धारित प्रक्रियाओं, एसओपी और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ ब्लास्टिंग रिकॉर्ड के व्यवस्थित संधारण पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान को व्यावहारिक रूप से कार्यस्थल पर लागू कर सुरक्षित एवं संरक्षित खनन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।

प्रक्रियागत अनुशासन और सतर्कता सुरक्षित ब्लास्टिंग के प्रमुख आधार

डीएमएस जी. संजय कुमार ने बीसीसीएल के खनन क्षेत्रों में सुरक्षित ब्लास्टिंग के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों और वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रक्रियागत अनुशासन, सतर्कता और प्रभावी निगरानी सुरक्षित ब्लास्टिंग के प्रमुख आधार हैं।

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में डीएमएस टॉम मैथ्यू ने विस्फोटकों के सुरक्षित भंडारण, परिवहन, उपयोग एवं हैंडलिंग से लेकर सुरक्षित ब्लास्टिंग प्रथाओं तक विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर के उपयोग, डीप-होल ब्लास्टिंग, ड्रिलिंग, ओपनकास्ट खनन में सुरक्षित ब्लास्टिंग, ब्लास्टिंग रिकॉर्ड के संधारण तथा डीप-होल ब्लास्टिंग के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

इसके अलावा टॉम मैथ्यू ने फायर एरिया में ब्लास्टिंग से संबंधित गजट अधिसूचना एवं उससे जुड़े सुरक्षा पहलुओं की भी जानकारी दी।

सिंफर के डॉ. सी. सॉमलियाना ने साझा किए ब्लास्टिंग इंजीनियरिंग के अनुभव

दूसरे तकनीकी सत्र में सिंफर के डॉ. सी. सॉमलियाना ने रॉक एक्सकेवेशन एवं ब्लास्टिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपने विशेषज्ञ अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रभावी एवं नियंत्रित ब्लास्टिंग के लिए बेहतर योजना, ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग के बीच उचित समन्वय तथा कार्यस्थल की परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।

डॉ. सी. सॉमलियाना ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुपालन को ब्लास्टिंग कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के साथ सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। दोनों तकनीकी सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के समक्ष अपने प्रश्न एवं व्यावहारिक समस्याएं भी रखीं, जिनका समाधान किया गया।

कार्यक्रम के अंत में महाप्रबंधक (एचआरडी) सुधाकर प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मंच संचालन एचआरडी की देवांशी जैन ने किया। कार्यशाला को सफल बनाने में प्रबंधक (खनन/एचआरडी) सुमित कुमार सहित एचआरडी एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मियों का विशेष योगदान रहा।

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