धनबाद। Bharat Coking Coal Limited (बीसीसीएल) के कोयला भवन मुख्यालय में प्रोजेक्ट स्कूलों के लिए गठित सेंट्रल एडवाइजरी कमिटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता निदेशक (मानव संसाधन) श्री मुरली कृष्ण रमैया ने की।
बैठक में विभागाध्यक्ष (कल्याण) श्रीमती किरण रानी नायक, वरीय प्रबंधक (वित्त) श्री पंकज कुमार सिंह तथा बीसीसीएल प्रोजेक्ट स्कूलों के प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापिकाएँ उपस्थित रहीं। इनमें श्री अजित कुमार दुबे (डीएवी, कुसुंडा), श्री प्रसेनजीत कुमार पाल (डीएवी, दुग्दा), श्रीमती इंदु प्रसाद (डीएवी, मुनीडीह), श्री सुब्रोतो मोदक (डीएवी, अलकुसा), श्री एन. एन. श्रीवास्तव (डीएवी, कोयलानगर), डॉ. अभिलाषा कुमारी (डीएवी, लोदना), श्री रामसुमन सिंह (एसवीएम, भूली) तथा श्री रमाकांत राणा (एसवीएम, सिनीडीह) शामिल थे।

बैठक के दौरान सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने अपने-अपने संस्थानों की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रस्तुतिकरण में छात्र-शिक्षक अनुपात, आधारभूत संरचना, उपलब्ध शैक्षणिक संसाधन, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और शैक्षणिक उपलब्धियों से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की गई। इन बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए स्कूलों की वर्तमान स्थिति, आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इस दौरान स्कूलों की ओर से डेफिसिट ग्रांट से संबंधित मांग भी रखी गई। इस विषय पर निदेशक (मानव संसाधन) श्री मुरली कृष्ण रमैया ने कहा कि संस्थानों की वास्तविक आवश्यकताओं और वित्तीय अनुशासन को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में आवश्यक समीक्षा और प्रक्रियात्मक पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि डेफिसिट ग्रांट से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना जरूरी है।

उन्होंने सभी स्कूलों में डेफिसिट ग्रांट के संदर्भ में नियमित त्रैमासिक और अर्धवार्षिक निरीक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही मुख्यालय स्तर पर एक ऑडिट कमिटी गठित करने के निर्देश दिए, जो समय-समय पर स्कूलों की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुझाव देगी, ताकि संस्थानों की कार्यप्रणाली अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बन सके।
अपने संबोधन में श्री मुरली कृष्ण रमैया ने कहा कि बीसीसीएल प्रोजेक्ट स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हें समय के साथ आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने स्कूलों के बीच पारस्परिक अधिगम को बढ़ावा देने तथा विभिन्न संस्थानों द्वारा अपनाई गई श्रेष्ठ शिक्षण पद्धतियों, नवाचारों और सफल पहलों को साझा करने पर जोर दिया, ताकि सभी स्कूल एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी प्रोजेक्ट स्कूल समन्वित प्रयासों के माध्यम से शिक्षा के उच्च मानकों को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर कार्य करेंगे और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के अपने उद्देश्य को और मजबूत बनाएंगे।
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