भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने श्रीनगर में आयोजित उद्योग संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति की अध्ययन यात्रा में भाग लेते हुए ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को बढ़ावा देने के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को प्रमुखता से रखा।
इस दौरान श्री अग्रवाल ने समिति के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा सहित अन्य सांसदों, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उद्योग एवं ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

बैठक में औद्योगिक विकास, सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका, ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों तथा क्षेत्रीय औद्योगिक संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। सहभागी संस्थाओं ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए, जिससे उद्योग क्षेत्र के समग्र विकास और प्रभावी नीति निर्माण की दिशा में सार्थक संवाद स्थापित हुआ।
अध्ययन यात्रा के दौरान बीसीसीएल ने सार्वजनिक क्रय नीति-2012 के तहत एमएसई से 25 प्रतिशत निर्धारित खरीद के कार्यान्वयन पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया। कंपनी ने बताया कि वह देश के स्वदेशी कोकिंग कोल उत्पादन में लगभग 58.5 प्रतिशत योगदान दे रही है और झरिया एवं रानीगंज क्षेत्र की 31 सक्रिय खदानों के माध्यम से इस्पात एवं ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा कर रही है।
प्रस्तुतीकरण में यह भी बताया गया कि बीसीसीएल ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में एमएसई खरीद के राष्ट्रीय लक्ष्य से कहीं अधिक उपलब्धि हासिल की। वित्तीय वर्ष 2024 में कंपनी ने 67.96 प्रतिशत, वित्तीय वर्ष 2025 में 61.34 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2026 में 73.49 प्रतिशत खरीद एमएसई से सुनिश्चित की।

कंपनी ने एमएसई सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए GeM पोर्टल के माध्यम से 100 प्रतिशत खरीद प्रक्रिया अपनाने, एससी/एसटी और महिला उद्यमियों के लिए 24 विशेष वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करने तथा ईएमडी छूट एवं पूर्व अनुभव संबंधी शर्तों में शिथिलता जैसी पहलों की जानकारी भी साझा की।
इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने कहा कि बीसीसीएल राष्ट्र निर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और सतत औद्योगिक विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी आधुनिक तकनीक, दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ कार्य करते हुए आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मजबूत करने में योगदान दे रही है। साथ ही, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के संरक्षण और प्रोत्साहन को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

उद्योग संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति की यह अध्ययन यात्रा क्षेत्रीय चुनौतियों, जमीनी अनुभवों और औद्योगिक संभावनाओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संवाद उद्योग क्षेत्र में बेहतर समन्वय, नीति निर्माण और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने में सहायक होंगे।
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