झरिया मास्टर प्लान के अंतर्गत पुनर्वासित एवं परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी रोजगार और आजीविका के अवसर विकसित करने की दिशा में शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में बेलगढ़िया पुनर्वास क्षेत्र में वस्त्र उद्योग (टेक्सटाइल यूनिट) स्थापित करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में आदित्य बिड़ला समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स) श्री के. वी. सुनील तथा राजधानी टेक्सटाइल्स के कार्यकारी निदेशक श्री प्रवेश कोचेता ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वासित परिवारों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं, के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय सृजन के स्थायी अवसर विकसित करना रहा।
बैठक में कोयला सचिव श्री विक्रम देव दत्त, केंद्रीय कोयला मंत्री के निजी सचिव श्री पंकज जैन, बीसीसीएल के सीएमडी श्री मनोज कुमार अग्रवाल, धनबाद के उपायुक्त श्री आदित्य रंजन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। सभी पक्षों ने इस पहल को सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
पहले हो चुका है बेंगलुरु का अध्ययन दौरा
बैठक के दौरान बताया गया कि बीसीसीएल के सीएमडी श्री मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में बीसीसीएल का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल गत माह बेंगलुरु गया था। वहां आदित्य बिड़ला लाइफस्टाइल लिमिटेड (एबीएलएल) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बेलगढ़िया में वस्त्र उद्योग स्थापित करने, उद्योग आधारित कौशल विकास, औद्योगिक सहयोग तथा पुनर्वासित एवं परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई थी।
प्रतिनिधिमंडल ने आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) की वस्त्र निर्माण इकाई का भी दौरा किया, जहां उत्पादन प्रणाली, गुणवत्ता प्रबंधन, औद्योगिक संचालन और रोजगार सृजन मॉडल का अध्ययन किया गया। इसी अध्ययन के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई।

महिलाओं और युवाओं को मिलेगा विशेष लाभ
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रस्तावित वस्त्र उद्योग इकाई के माध्यम से पुनर्वासित परिवारों, खासकर महिलाओं और युवाओं, को कौशल विकास, स्वरोजगार और नियमित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे झरिया मास्टर प्लान के सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास के उद्देश्यों को और मजबूती मिलेगी।
एनआरएससी के साथ सैटेलाइट मॉनिटरिंग पर भी हुई चर्चा
इसी क्रम में नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के साथ अलग से बैठक आयोजित की गई। इसमें झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वासित आबादी की सैटेलाइट इमेजिंग के माध्यम से पहचान, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी तथा पुनर्वास प्रक्रिया की वैज्ञानिक मॉनिटरिंग पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने आधुनिक तकनीक के उपयोग से भविष्य की कार्ययोजनाओं को अधिक सटीक और डेटा आधारित बनाने पर बल दिया।
बैठक में सहमति बनी कि झरिया मास्टर प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुनर्वास, रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आधुनिक तकनीक के समन्वित उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि परियोजना प्रभावित परिवारों के जीवन स्तर में स्थायी और सकारात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
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