नई दिल्ली/धनबाद। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की बहुप्रतीक्षित एवं रणनीतिक मुराईडीह कोलियरी परियोजना को शीघ्र गति देने के उद्देश्य से बीसीसीएल ने महत्वपूर्ण पहल की है। बीसीसीएल के सीएमडी श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के इंदिरा पर्यावरण भवन में वन महानिरीक्षक (IGF) श्री आर. रघु प्रसाद के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर परियोजना के लिए प्रथम चरण (Stage-I) की वन स्वीकृति (Forest Clearance) से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक के दौरान बरोरा क्षेत्र अंतर्गत प्रस्तावित मुराईडीह कोलियरी परियोजना के तकनीकी, पर्यावरणीय तथा राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाने और इसे शीघ्र पूरा कराने के संबंध में सकारात्मक चर्चा हुई।
गौरतलब है कि मुराईडीह कोलियरी बीसीसीएल की सबसे महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनन परियोजनाओं में शामिल है। वन स्वीकृति लंबित रहने के कारण यह परियोजना लंबे समय से शुरू नहीं हो सकी है, जिससे प्रस्तावित कोयला उत्पादन भी प्रभावित रहा है।
परियोजना के तहत करीब 20 मिलियन टन (20 MT) कोकिंग कोयले के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा इसकी अनुमानित खनन अवधि 9 वर्ष होगी। इस परियोजना से W-IV ग्रेड के उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल का उत्पादन होगा, जो देश के इस्पात उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आयातित कोकिंग कोयले पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती मांग और औद्योगिक विकास को देखते हुए इस परियोजना का शीघ्र क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना शुरू होने से बीसीसीएल की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी तथा रोजगार सृजन, राजस्व वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
बीसीसीएल का मानना है कि मुराईडीह कोलियरी परियोजना को समय पर वन स्वीकृति मिलने से न केवल कंपनी बल्कि कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और देश की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा को भी दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। इसी उद्देश्य से सीएमडी श्री मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा की गई यह पहल परियोजना को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
