भारत के सामाजिक न्याय के इतिहास में 25 अगस्त का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है। इसी दिन 1918 में बिहार की धरती पर एक ऐसे व्यक्तित्व का जन्म हुआ, जिसने सदियों से उपेक्षित, वंचित और शोषित समाज को न केवल आवाज दी, बल्कि उन्हें उनका संवैधानिक हक दिलाने का मार्ग भी प्रशस्त किया। वे थे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मंडल आयोग के अध्यक्ष, बी.पी. मंडल जी।
प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक सफर
बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल जी का जन्म 25 अगस्त 1918 को अविभाजित बिहार के मधेपुरा जिले के मुरहो गांव में हुआ था। 1967 में वे विधायक चुने गए और 1 फरवरी 1968 को बिहार के सातवें मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनका कार्यकाल केवल 30 दिन का रहा, लेकिन इस अल्प अवधि में भी उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उत्थान के लिए कई साहसिक निर्णय लिए।
मंडल आयोग: एक ऐतिहासिक पड़ाव
बी.पी. मंडल जी के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि 1978 में आई, जब सरकार ने सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया और इसकी अध्यक्षता बी.पी. मंडल जी को सौंपी। यही आयोग ‘मंडल आयोग’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
आयोग ने पूरे देश का दौरा कर 3743 जातियों का सर्वेक्षण किया और 31 दिसंबर 1980 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि देश की आबादी का लगभग 52 प्रतिशत हिस्सा अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class) का है। आयोग ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की।
1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने इस रिपोर्ट को लागू किया। इस एक निर्णय ने भारत की राजनीति और समाज की दशा-दिशा ही बदल दी।
विरोध और सामाजिक न्याय की जीत
मंडल जी ने कहा था – “अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग संख्या में भले ही अधिक हैं, लेकिन व्यवस्था में उनकी भागीदारी नगण्य है। आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे अन्याय की भरपाई है।”
आज जब हम देखते हैं कि अन्य पिछड़ा वर्ग समाज के युवा IAS, IPS, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर बनकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं, तो यह बी.पी. मंडल जी के उसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
आज की प्रासंगिकता
आज भी देश में जातिगत जनगणना की मांग उठ रही है, ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। निजी क्षेत्र में, न्यायपालिका में और उच्च शिक्षा के उच्च पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग की भागीदारी अभी भी अपेक्षित स्तर से बहुत कम है।
निष्कर्ष
बी.पी. मंडल जी ने केवल आरक्षण नहीं दिया, उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग में आत्मसम्मान और राजनीतिक चेतना जगाई। आज उनकी जयंती पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उस सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे, जिसका सपना मंडल जी ने देखा था।
लेखक – देव कुमार वर्मा (अन्य पिछड़ा वर्ग चिंतक एवं BC(OBC) Employee welfare Association बीसीसीएल प्रभारी)
