नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पानी पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। सम्मेलन में देश की जल सुरक्षा, जल संरक्षण, जल प्रबंधन, बांध सुरक्षा, उपचारित जल के उपयोग और जल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका समेत विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्र और राज्यों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।
यह सम्मेलन प्रधानमंत्री की उस सोच के अनुरूप आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला का पहला आयोजन है, जिसका उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करना, सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी विकसित करना है।
सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद, जल संसाधन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री हफीजुल हसन अंसारी और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड के सचिव श्री अबू इमरान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दो दिनों तक चली चर्चा की सराहना करते हुए कहा कि सम्मेलन से सामने आए ठोस, कार्यान्वयन योग्य और समयबद्ध कार्य बिंदुओं को जमीन पर उतारने के लिए लगातार समीक्षा और फॉलो-अप जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन केवल एक बार की गतिविधि बनकर नहीं रहने चाहिए, बल्कि इनसे निकले सुझावों और फैसलों पर निरंतर काम होना चाहिए।
जल संरक्षण के लिए ‘जल उत्सव’ को बढ़ावा देने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण में जनभागीदारी को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘जल उत्सव’ को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने गाद निकालने के कार्य को नियमित कार्यक्रम का हिस्सा बनाने तथा इसके लिए स्पष्ट नियम और मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने पर भी जोर दिया।
बांध सुरक्षा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रत्येक मानसून से पहले पूरी तैयारी करने, निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करने और स्कूली विद्यार्थियों को बांध सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने इससे संबंधित विषयों को शिक्षा के पाठ्यक्रम में उचित तरीके से शामिल करने पर भी बल दिया।

शहरों की भविष्य की जल जरूरतों के लिए अभी से तैयारी
प्रधानमंत्री ने बढ़ते शहरीकरण और आबादी के कारण भविष्य में पैदा होने वाली पानी की मांग को देखते हुए शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक और तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने शहरी निकायों के लिए भी इसी तरह के चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने पानी बचाने वाली आधुनिक तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने की अपील की। इसके साथ ही भारतीय निर्माताओं और संबंधित हितधारकों को प्रभावी जल समाधान विकसित करने तथा उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने में मदद के लिए विशेष प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव दिया। इन आयोजनों के माध्यम से दुनिया भर में अपनाई जा रही सफल जल संरक्षण तकनीकों और बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने पर भी जोर दिया गया।


जल डेटा के बेहतर प्रबंधन में AI के इस्तेमाल पर जोर
प्रधानमंत्री ने मजबूत जल डेटा गवर्नेंस की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जल क्षेत्र से संबंधित डेटा को एकीकृत करने, व्यवस्थित रूप से प्रबंधित करने, उसका विश्लेषण करने और प्रभावी इस्तेमाल की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
उन्होंने एक समान प्रारूप में डेटा एकत्र करने और उसका विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग की सिफारिश की। प्रधानमंत्री ने पानी की कमी से निपटने के लिए कृषि और औद्योगिक कार्यों में उपचारित पानी के उचित उपयोग तथा इसके लिए पहले से एकीकृत योजना तैयार करने पर भी जोर दिया।
राज्यों के बीच अध्ययन-दौरे कराने का सुझाव
प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और जल शासन से संबंधित ज्ञान एवं क्षमता बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों की भागीदारी वाले अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरे आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि एक राज्य में सफल जल प्रबंधन उपायों से दूसरे राज्य भी व्यावहारिक रूप से सीख सकें और उन्हें अपने यहां लागू कर सकें।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सही योजना, दृढ़ इच्छाशक्ति, आवश्यक संसाधनों और सक्षम अधिकारियों के माध्यम से पानी की कमी जैसी चुनौती को भी अवसर में बदला जा सकता है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने बताए चार प्रमुख लक्ष्य
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार प्रमुख नतीजों को रेखांकित किया। इनमें जल संबंधी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना, जल संरक्षण को निरंतर जन आंदोलन के रूप में मजबूत करना, पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं के प्रभावी संचालन और रखरखाव को संस्थागत स्वरूप देना शामिल है।
सम्मेलन में जल सुरक्षा को केंद्र और राज्यों की साझा प्राथमिकता बनाते हुए आधुनिक तकनीक, जनभागीदारी, बेहतर डेटा प्रबंधन और राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान के जरिए देश में टिकाऊ जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
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