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बीसीसीएल ने नए श्रम कानूनों पर आयोजित किया सेमिनार, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 के प्रावधानों पर हुई विस्तृत चर्चा।

Bynoorimedia@2015

May 30, 2026

धनबाद। भारत सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने शुक्रवार को जगजीवन नगर स्थित कल्याण मंडपम में ‘नए श्रम संहिताओं के तहत औद्योगिक संबंध संहिता’ विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया। कोल इंडिया लिमिटेड के निर्देशों के आलोक में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच नए श्रम कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अनुपालन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने की। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी-संचालन) संजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) कुमार मनोज, महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) सुधाकर प्रसाद, विभागाध्यक्ष (विधि) डॉ. कुमार शरत सिन्हा, विभागाध्यक्ष (औद्योगिक संबंध/सीएसआर) सुरेन्द्र भूषण, विभागाध्यक्ष (प्रशासन) मनीष मिश्रा सहित मुख्यालय और विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

सेमिनार के मुख्य वक्ता झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता ने नए श्रम संहिताओं, विशेष रूप से इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 के विभिन्न प्रावधानों, कानूनी पहलुओं और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के हितों की सुरक्षा और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं, जिनमें मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 शामिल हैं। इनके माध्यम से सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा, रोजगार सृजन, सरल अनुपालन और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

अनूप कुमार मेहता ने जानकारी दी कि औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के तहत ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926, औद्योगिक रोजगार अधिनियम 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का विलय किया गया है। उन्होंने फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, कौशल निधि, ट्रेड यूनियन की मान्यता, श्रमिक और उद्योग की विस्तारित परिभाषा, 300 कर्मचारियों तक सीमा वृद्धि, 14 दिन की अनिवार्य हड़ताल सूचना, दो-सदस्यीय औद्योगिक न्यायाधिकरण तथा गैर-अपराधीकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी विस्तार से जानकारी दी।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि बदलते औद्योगिक परिवेश में श्रम सुधारों की जानकारी और उनका प्रभावी अनुपालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताएं श्रमिक हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और संगठनात्मक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

स्वागत संबोधन में निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने कार्यक्रम की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नए श्रम कानूनों के विभिन्न प्रावधानों की समुचित जानकारी उपलब्ध कराना है। वहीं निदेशक (तकनीकी-संचालन) संजय कुमार सिंह ने कहा कि तेजी से बदलते कार्य परिवेश में नए श्रम सुधारों की स्पष्ट समझ औद्योगिक संस्थानों के सुचारु संचालन और विधिक अनुपालन के लिए आवश्यक है।

कार्यक्रम के समापन सत्र में संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने नए श्रम कानूनों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता ने सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष (विधि) डॉ. कुमार शरत सिन्हा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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