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जल जीवन मिशन 2.0 MoU: झारखंड को मिले ₹2,500 करोड़, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र से मांगे ₹6,500 करोड़ बकाया फंड।

Bynoorimedia@2015

Jun 3, 2026

रांची, 2 जून 2026। जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत झारखंड सरकार और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। रांची में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने की, जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

समारोह की शुरुआत केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद के बीच अभिवादन आदान-प्रदान के साथ हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, जल शक्ति मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के प्रबंध निदेशक तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में जल जीवन मिशन के तहत ₹24,635 करोड़ की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मल्टी विलेज स्कीम (MVS) और सिंगल विलेज स्कीम (SVS) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक नल से जल पहुंचाने का कार्य तेजी से चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए लंबित केंद्रीय अंशदान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य को अब तक पर्याप्त धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि लगभग 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि केंद्र की ओर से केवल 46 प्रतिशत अनुदान जारी किया गया है। इस आधार पर राज्य ने केंद्र से करीब ₹6,500 करोड़ की लंबित सहायता राशि जल्द जारी करने की मांग की।

उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) समय पर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही सिंगल विलेज स्कीम के सतत संचालन के लिए प्रत्येक गांव में नियुक्त जल सहियाओं को राज्य सरकार द्वारा ₹2,500 प्रतिमाह सहायता दिए जाने की जानकारी देते हुए केंद्र से सहयोग की अपेक्षा जताई।

मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में तैयार होने वाली सभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में आवश्यक सभी घटकों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्पष्ट किया कि रेट्रोफिटिंग तथा नियमित संचालन एवं रखरखाव (O&M) कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के खर्चों के लिए 16वें वित्त आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं (PRI) को दिए जाने वाले अनुदान का उपयोग किया जा सकता है।

बैठक में झारखंड के लिए विशेष रूप से ₹2,500 करोड़ की राशि आवंटित करने की जानकारी दी गई। हालांकि इसके लिए राज्य को JJM 2.0 के सभी मानकों और दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा जिलाधिकारियों (DM/DC) को परियोजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए।

सरकार ने ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा करने का निर्णय लिया। साथ ही झारखंड जल जीवन मिशन के प्रबंध निदेशक का पद संयुक्त सचिव रैंक के अधिकारी को सौंपने की सिफारिश की गई। बैठक में ₹1,400 करोड़ की कथित अनुचित (Inadmissible) लागत वाले ओवरसाइज्ड घटक की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक का समापन जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों को शीघ्र लागू करने और लंबित परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने के संकल्प के साथ हुआ, ताकि झारखंड के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल की सुविधा पहुंचाई जा सके।

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