नई दिल्ली, 2 जुलाई 2026:
बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 17वें वर्ल्ड रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी कांग्रेस-2026 (WRETC-2026) में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 1-2 जुलाई को एनर्जी एंड एनवायरनमेंट फाउंडेशन द्वारा भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से किया गया।
‘रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी एफिशिएंसी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस फॉर अ ग्रीन इकॉनमी’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के नीति-निर्माताओं, ऊर्जा विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों, अवसरों और सतत विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
अपने संबोधन में बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए ऊर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) को संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सौर, पवन, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का विस्तार आवश्यक है, लेकिन वर्तमान और निकट भविष्य में देश की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत आधार कोयला ही रहेगा।

उन्होंने कहा कि कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भारत के विकास के दो सशक्त स्तंभ हैं। बीसीसीएल की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी प्राइम कोकिंग कोल का उत्पादन करती है, जो इस्पात उद्योग की आधारभूत आवश्यकता है और रेलवे, मेट्रो, पुल, पवन ऊर्जा संयंत्रों तथा सौर अवसंरचना जैसी हरित विकास परियोजनाओं के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
मनोज कुमार अग्रवाल ने सुरक्षित, स्मार्ट और सतत खनन को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि बीसीसीएल डिजिटल माइन प्लानिंग, ड्रोन सर्वेक्षण, जीआईएस मैपिंग, आईओटी आधारित मॉनिटरिंग, मशीनीकरण और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सुरक्षा, उत्पादकता और परिचालन दक्षता को लगातार मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत बीसीसीएल सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, खदान जल पुनर्चक्रण, ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग, वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास जैसी अनेक हरित पहलों को प्रभावी रूप से लागू कर रहा है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का ऊर्जा भविष्य संतुलित ऊर्जा मिश्रण (बैलेंस्ड एनर्जी मिक्स) पर आधारित होगा, जिसमें कोयला ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा सततता, ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की संभावनाओं और आधुनिक प्रौद्योगिकी ऊर्जा दक्षता को नई दिशा प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी कांग्रेस (WRETC) आज नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, विद्युत उपयोगिताओं, ई-मोबिलिटी, जैव ऊर्जा, बायोमास, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल मैटेरियल्स जैसे विषयों पर केंद्रित एक प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। इस वर्ष के आयोजन में नवीन अवधारणाओं, उभरते रुझानों और अत्याधुनिक तकनीकी विकास के साथ हरित पहलों को बढ़ावा देने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों पर विशेष बल दिया गया।
सम्मेलन में 100 से अधिक सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों, 350 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि एक हजार से अधिक आगंतुकों ने इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का अवलोकन किया।
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